त्र्यंबकेश्वर नित्य अभिषेक सेवा

श्री क्षेत्र त्रंबकेश्वर नित्य अभिषेक सेवा

श्री क्षेत्र त्रंबकेश्वर नित्य अभिषेक सेवा
जल की धारा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, अत: शुद्ध जल से भगवान शिव का अभिषेक करने पर भरपूर जलवृष्टि होती है। जल से अभिषेक करने से तेज ज्वर भी शांत हो जाता है। लक्ष्मी प्राप्ति के हेतु गन्ने के रस से इन रसों द्वारा शुद्ध चित्त के साथ भगवान शिव का अभिषेक करने पर भगवान भक्त की सभी कामनाओं की पूर्ति करते हैं। भगवान का अभिषेक करना चाहिए। 
श्रावण माह में भगवान शिव का अभिषेक विशेष फलदायी होता है।  मोक्ष की कामना के हेतु तीर्थों के जल में काले तिल द्वारा अभिषेक किया जाता है। शिवजी पर काले तिल चढ़ाने से घोर पापों (पातक) का नाश हो जाता है।
ऋतु अनुसार पुष्पों से शिवपूजन करने से संसार के आवागमन से मनुष्य मुक्त हो जाता है। के अभिषेक से भगवान आशुतोष की प्रसन्नता प्राप्त हो जाती है, सभी ग्रहजन्य बाधाएं शान्त हो जाती हैं, अपमृत्यु भाग जाती है और सभी प्रकार के सुखभोग प्राप्त हो जाते हैं।
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 शिवलिंग के अर्चना से मनुष्य को भूमि, विद्या, पुत्र, बान्धव, श्रेष्ठता, ज्ञान एवं मुक्ति सब कुछ प्राप्त हो जाता है। धरती पर जिनके पैर लड़खड़ा जाते हैं, उनके लिए भूमि ही सहारा है; उसी प्रकार जिन्होंने शिव का अपराध किया है, उनके लिए भी भगवान शिव ही शरणदाता हैं। भगवान शंकर सबके एकमात्र मूल हैं, उनकी पूजा ही सबसे बढ़कर है; क्योंकि मूल के सींचे जाने पर शाखा रूपी समस्त देवता स्वत: तृप्त हो जाते हैं।
“शिवे भक्ति: शिवे भक्ति: शिवे भक्तिर्भवे भवे।
अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम।।”
अर्थात्–"प्रत्येक जन्म में मेरी शिव में भक्ति हो, शिव में भक्ति हो, शिव में भक्ति हो। शिव के सिवा दूसरा कोई मुझे शरण देने वाला नहीं। महादेव ! आप ही मेरे लिए शरणदाता हैं।"
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